यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। मनुस्मृति ३/५६ ।।

Anvaya: यत्र तु नार्यः पूज्यन्ते तत्र देवताः रमन्ते, यत्र तु एताः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति) ।

जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नही होती है, उनका सम्मान नही होता है वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं।
Where women are worshiped, there lives the Gods. Wherever they are not worshiped, all actions result in failure.

शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम् ।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा ।। मनुस्मृति ३/५७ ।।

Anvaya: यत्र जामयः शोचन्ति तत् कुलम् आशु विनश्यति, यत्र तु एताः न शोचन्ति तत् हि सर्वदा वर्धते ।

जिस कुल में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं ,वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती है वह कुल सदैव फलता फूलता और समृद्ध रहता है । (परिवार की पुत्रियों, बधुओं, नवविवाहिताओं आदि जैसे निकट संबंधिनियों को ‘जामि’ कहा गया है ।)
The family in which women (such as mother, wife, sister, daughter et al.) are full of sorrow that family meets its destruction very soon; while the family in which they do not grieve is always prosperous.

References:
योगेन्द्र जोशी. ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ इत्यादि – मनुस्मृति के वचन (2009/09/11). https://vichaarsankalan.wordpress.com/2009/09/11/

Dr Santwana Mishra. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता. (2017/01/28). https://santwanamishra1.wordpress.com/2017/01/28

1 thought on “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”

  1. Read these Shlokas, as a child in a temple in Haridwar. Unfortunately today’s populace has chosen to ignore these. Fuelled by the life style demands and a cut-throat competition for accessing the maximum for self has driven nearly all to forget.
    About 35 years ago in a Buddhist monastery, in China, a monk taught me a couplet, that stayed quite close to my heart, it said “the generation that ignores it’s older people will soon see degeneration to the extent that it will degenenerate into a geriatric society, incapable of progress”.
    May Lord save us from going that lane!

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